मंगलवार, 16 नवंबर 2010

विश्व सेवक रक्षक श्याव्हडो और भारत के जन सेवकों के बीच का मामला, सम्मन, तारीख 15.11.2010 जबाब की अंतिम तिथि 19.11.2010, लेख संख्या, 161120100402सा,

  1. विश्व सेवक रक्षक श्याव्हडो और भारत के जन सेवकों के बीच का मामला, सम्मन, तारीख 15.11.2010 जबाब की अंतिम तिथि 19.11.2010, लेख संख्या, 161120100402सा,

  1. आप को जानकारी दी जा रही है, की आप भारत वासियों की सेवा और सुरक्षा करने की बजाय भारत वासियों के हित के लिये बनाया गया कानून, जो कि बदला जा चुका है, या खतम किया जा चुका है, या खतम किया जा रहा है, जो जन हित कानून बचा हुआ है, आप अपने हितों के लिये उस बचे हुये अपने ही कानून को तोड कर बसूली कर रहे है, सबूत धरती वासियों के मूल अधिकारो की असमानता और जीवन सैली मे सबको दिख रहा है, सबूत हर फाइल मे आप के कार्यालयों मे आप की कैद मे है, उनमें से एक बसूली के सबूत की कोपी साथ लगी है, या इसे ओन लाइन इस http://shyawhdosarkarjanata.blogspot.com पते पर देखा जा सकता है या मेल के साथ फाइल अटैच है, जो आपको अपराधी घोषित करने के लिये पर्याप्त है, 19.11.2010 तक जबाब दें अपना जबाब अपने उस अधिकारी को दे जो आप से रिपोर्ट लेने के लिये विधिवत स्थापित किया गया है यदि ना लें तो हमे http://shyawhdosarkarjanata.blogspot.com साइट पर कोमेंट या टिप्पणी पर क्लिक करके खुलने वाली या पहले से खुली विंडो मे दें, व अपना पहचान कोड डाले,  

  1. जबाब दें कि DELHI DISTRICT COURTS USERS’ HANDBOOK मे दिये गये शिकायत के नियम और फोरमैट  21.12 Annexure L - Specimen of Criminal Complaint के होते हुये, एक बिना साइन किये हुये कागज, जो कि एक लिमिटेड बैंक द्वारा की गई शिकायत है, जिस पर डेट साइन मुहर नोटरी अटैस्टेड प्रोसेस तक नही है, जो इस फोरमैट के जैसा बनाया गया है, जिसकी कोपी साथ लगी है, इसे अदालत द्वारा स्वीकार करके इसपर सम्मन भेजना सही है,

  1. जबाब दें कि पहला सम्मन धारा 61, 63, 64 65, 66, 67, क्रि. प्रो. 1973 के तहत देने की बजाय धारा 68 क्रि.प्रो.1973 के तहत देना सही है,         

  1. जबाब दें कि केस की शुरूआत की धारा 190 क्रि. प्रो. 1973 के तहत ये सम्मन सही है,

  1. जबाब दें कि आप इस जन हित आधार के आधार पर सही है,

  1. जबाब दें कि अदालत का काम, जिसने सम्मन भेजा है, सम्भावित दोषी को उसके दोष की सभी जानकारी नही देना सही है,

  1. जबाब दें कि अदालत का काम जिसने सम्मन भेजा है, दोष ना बता कर धम्काने के तरीके से धमकाना सही है,

  1. जबाब दें कि अदालत का काम एक नासमझ को, फ्री कानूनी सहायता मौजूद होते हुये, अपने हित के लिये ईमान बेचने वालो के पास, भेजना सही है,

  1. जबाब दें कि पहले जनहित सूचना को सरलता से नजर आने वाली जगह से हटाना, छिपना, उसकी जगह गुमराह करने वाली जानकारी लगाना, फिर अपने द्वारा दी जाने वाली जानकारी किसी लालची से लेने के लिये कहना, फिर जानकारी के अभाव मे बसूली करना, बसूली ना होने पीटना, कैद करना, गुलाम बनाना और बसूली के लिये कानून का गलत इस्तेमाल करके दहशत बनाये रखना आपके मान्य कानून के तहत ठीक है,

  1. जबाब दे कि आपके असंख्य विभागों मे, इस विभाग की, इस फाइल मे, ऐसा नही किया गया जा रहा है, यदि जबाब ना दिया तो आप पर आप की ही मान्य धारा, जिसके कई अर्थ है, जो जान कर कमियों के साथ बनाई गई है, जो कि कई अर्थ वाला है, जो आपके हितैसी के दोषी होने पर लागू नही होता, पर बासूली मे भारत वासियों पर लागू होता है, यहां धारा 68 क्रि.प्रो.1973 की बात हो रही है, जो सबूत मे मौजूद है, जिसमे जान कर ना समझ मे आने वाले शब्दों को डाला गया है, जो बसूली के लिये इस्तेमाल की जाती है, आप पर लग चुकी होगी, और आरोप सही समझा जायेगा, जबाब अकल्पनीय बम्हाण्ड की सार्वजनिक अदालत मे देना है, जिसका पता http://shyawhdosarkarjanata.blogspot.com है,

  1. यहां वकील से बात करने की इजाजत नही है,

  1. यहां लेखों का विशाल तादाद की जगह छोटा जबाब लिया जाता है जो धरती वासियों को संतुष्ट कर सके

  1. यहां बोलते समय बोलने मे कमी आने पर निर्णय नही बदलता, पुनः तसल्ली से सुना जाता है

  1. यहां हर निर्णय लेख के आधार पर किया जाता है,

  1. यहां पीडित की जानकारी पर नही न्याय देने वाले की जानकारी के अनुसार न्याय दिया जाता है


  1. यहां हर सवाल का जबाब लेख मे देना है,

  1. यहां सरल जनता की समझ मे आने वाले वाक्य और शब्दों का इस्तेमाल होता है

  1. यहां भारत मे सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली सरल बोलचाल वाली भाषा हिन्दी का इस्तेमाल होता है

  1. यहाँ धरती के निवासी 75% से जिस नियम को सही गलत साबित करते है, जो अपने मत का आधार बताने योग्य होते है, जो आधार मानवता की सेवा सुरक्षा विस्तार करता है वही कानून होता है इस लिये यह अकल्पनीय ब्रम्हांड का न्यायालय, संसद, कार्यपालिका, और प्रयोग शाला है,

  1. यहां देश व धरती स्तर के नियंत्रकों (सरकारों) और धरती वासियों के समूहों के बीच समानता बनाने के लिये विश्व घोषणायें की जाती है,

  1. यहां धरती वासियों को शिकार होने से बचाने की सीख देने की विश्व घोषणायें की जाती है, और अधिक जानने के लिये ओन लाइन http://www.blogger.com/profile/14893483234567585875  या गूगल पर pohinin और  shyawhdo शब्दों द्वारा खोज करें और हमारी विश्व सेवा सुरक्षा को जाने, जय धरती, जय मानवता, विश्व सेवक रक्षक, श्याव्ह्डो      

                                               

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